जिले में 70 फीसदी महिलाएं नहीं कर रहीं सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल, बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के मामले

प्रतीकात्मक चित्र

नोएडा : जिले में 70 फीसदी से भी ज्यादा महिलाएं आज भी सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। इसकी वजह से सर्वाइकल कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ रही हैं। यह कहना है जिला अस्पताल की सीनियर गाइनोकॉलजिस्ट डॉ़ अजय का। सेक्टर-39 स्थित नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च सेंटर में आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। सेनेटरी नेपकिन के मार्केट पर ब्रैंडेड कंपनियों का कब्जा है इसके चलते एक आम महिला के लिए इन्हें इस्तेमाल करना उनके बजट से बाहर है।

ज्यादा ब्लीडिंग ज्यादा खर्च

आमतौर पर हरेक महिला का सेनेटरी नेपकिन का हर महीने का खर्च 150 से 200 तक होता है। अच्छी क्वॉलिटी के सेनेटरी पैड इससे कम खर्च में नहीं मिल पाते। डॉक्टरों के अनुसार इंफेक्शन से बचाव के लिए हर 4-5 घंटे में पैड बदलना जरूरी है। हर महीने एक महिला के औसतन 15-20 पैड खर्च हो जाते हैं। वहीं ज्यादा ब्लीडिंग वाली महिलाओं को एक बार में तीन-तीन पैड एक साथ इस्तेमाल करने पड़ते हैं। इसके चलते उनका 400-500 रुपये तक हर महीने सेनेटरी पैड पर खर्च हो जाता है।

हो रहे हैं कई तरह के इंफेक्शन

ओपीडी में हर रोज 150-120 महिलाएं आती है। 70 फीसदी से भी ज्यादा ऐसी हैं जो सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल नहीं करती हैं। उनके आर्थिक हालात ऐसे नहीं हैं कि वह हर महीने 100-200 रुपये सेनेटरी नेपकिन पर खर्च कर सकें। इसकी वजह से उन्हें कई तरह के इंफेक्शन होते रहते हैं। मात्र 30-35 की उम्र में ही महिलाओं के पेप्समीयर टेस्ट पॉजिटिव आ रहा है। -डॉ. अजय, सीनियर गाइनोकॉलजिस्ट, जिला अस्पताल

हो सकती हैं ये बीमारियांवैजाइनल इंफेक्शन

एचपीवी इंफेक्शन (ह्यूमन पैपेलोमा वायरस)

सर्वाइकल कैंसर

सर्विक्स (यूट्रस का मुंह) इंफेक्शन

यूट्रस इंफेक्शन

फैलोपियन ट्यूब और ओवरी का इंफेक्शन

पैलविक इंफ्लेमेट्री डिजीज

लंबे समय तक इंफेक्शन की चपेट में रहने की वजह से प्रजनन क्षमता का कम होना

बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के मामले

सेक्टर-39 स्थित नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में होने वाले सभी तरह के कैंसर में अकेले 22 फीसदी का आंकड़ा सर्वाइकल कैंसर का है। इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ. रवि महरोत्रा का कहना है कि इनमें सबसे ज्यादा महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों व गरीब तबके से होती हैं। सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल न करना इसकी एक बड़ी वजह है। ये महिलाएं पहले एचपीवी वायरस की चपेट में आती हैं जो धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले लेता है।

मैं तो कपड़ा ही इस्तेमाल करती हूं। अच्छी क्वॉलिटी के सेनेटरी पैड का डिब्बा 100-150 रुपये से कम नहीं आता। सस्ता वाला दो-चार बार इस्तेमाल किया लेकिन वह मुझे सूट नहीं किया। उससे खुजली हो जाती है। मैं हर महीने इतने पैसे कहां से लाऊं। -सविता, वाजिदपुर

शादी से पहले तो कभी-कभी पैड इस्तेमाल कर लेती थी। अब घर-गृहस्थी के खर्च के बारे में सोचना पड़ता है। अब तो कई साल से कपड़ा ही इस्तेमाल कर रही हूं। डॉक्टर भी पैड ही इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं लेकिन पैड तो पैसों से आते हैं सलाह से नहीं। -गीता राय, राहुल विहार

मेरी तो पूरी जिंदगी ऐसे ही निकल गई है। अब क्या पैड इस्तेमाल करुंगी। मुझे यूट्रस में इंफेक्शन है उसका इलाज करा रही हूं। डॉक्टर भी कहते हैं कपड़ा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए लेकिन हमारी मजबूरी हैं। पिंटू देवी, होशियारपुर

मेरे घर में सब महिलाएं साफ कपड़ा ही इस्तेमाल करती हैं ताकि इंफेक्शन न हो। फिर भी हो जाता है तो क्या करें। मुझे बहुत हेवी ब्लीडिंग होती है। अगर पैड इस्तेमाल करूं तो कई सौ रुपये एक बार में खर्च हो जाएं कहां से लाऊंगी इतने पैसे। सितारा बेगम, कनावनी

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