स्तन कैंसर

स्तन कैंसर क्या हैं?
स्तन कैंसर स्तन की कोशिकाओं में शुरू होने वाला एक ट्यूमर है (जो शरीर के अन्य उत्तकों एवं बाकी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।) यह महिलाओं एवं पुरूषों दोनों में हो सकता है; यद्यपि पुरूषों में यह दुर्लभ ही मिलता है।[1,2]

भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर प्रथमतर कैंसर है।[3,4]
यहाँ जो जानकारी दी गई है वह महिलाओं के स्तन कैंसर से संबंधित है।

आँकड़े
भारत में सन् 2012 में करीब 1,44,937 नये मामले दर्ज हुये है और करीब 70,218 मृत्यु स्तन कैंसर से हुईं।[5] 

स्तन रचना विज्ञान[6]

महिला के स्तन में विशेष ग्रथियाँ (लोब्यूल्स) होती हैं जो दुग्ध का उत्पादन करती हैं। स्तन में दूध के उत्पादन की संरचना में 15-20 खण्ड होते हैं। प्रत्येक खण्ड में अनेक छोटे लोब्यूल्स होते हैं, जिनमें सूक्ष्म ग्रन्थियां होती हैं; जो दूध का उत्पाद करती है। स्तन की संरचना में छोटी छोटी दुग्ध नलिकाओं का जाल होता है, जिनके द्वारा दूध निप्पल से आता है। निप्पल के आसपास का परिवेश जो गहरे रंग का होता है, उसे ‘एरिओला‘ कहते है। स्तन में रक्त व लसीका वाहिकाओं और लिम्फ नाड्स भी होते हैं।

स्तन की लसीका प्रणाली
मुख्य रूप से स्तन कैंसर लसीका प्रणाली के माध्यम से फैलता है। लसीका वाहिकायें एक साफ तरल पदार्थ लाती है जिसे लिम्फ कहते है। ये लसीका वाहिकायें लिम्फ नोड्स में जाती है। लिम्फ नोड्स का आकार बीन्स की तरह होता है, इनमें संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाएँ (प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएँ) मौजूद होती है। ये वाहिकायें स्तन से निम्न नलिकाओं में जाती है;

  • काॅलर बोन के आसपास के लिम्फ नोड्स
  • बगल के नीचे के लिम्फ नोड्स
  • छाती की हड्डी के पास स्तन के अंदर

स्तन कैंसर के लिए जोखिम कारक वह है जो स्तन कैंसर ग्रसित होने की संभावना को बढ़ाता है।
जोखिम कारक होने का यह आशय नहीं है कि आपको निश्चित रूप से स्तन कैंसर होगा।

जोखिम कारक या तत्व (“संशोधन योग्य नही”)  [7]

  • लिंग: महिलाओं में स्तन कैंसर पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा पाया जाता है। स्तन कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि के लिये हार्मोन जिम्मेदार है। (इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरोन)
  • उम्र: उम्र बढ़ने के साथ स्तन कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। उत्तर भारत में किये गये एक अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर ग्रसित महिलाओं की औसत आयु 45 से 50 वर्ष के बीच है।
  • कैंसर का पारिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में आपकी माता, बहन या बेटी को कम आयु में कैंसर हुआ हो तो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपके पिता या भाई को स्तन कैंसर हुआ हो तो भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर स्तन कैंसर के मामलों में पारिवारिक इतिहास कारक नही पाया जाता है।[8] और पढ़े
  • आनुवंशिक कारक: यदि आपको अपने माता पिता से कुछ दुर्लभ जीन उत्परिवर्तन विरासत में मिले हैं तो आप स्तन कैंसर की वृद्धि के जोखिम में हैं। सबसे सामान्य जीन उत्परिवर्तन जो स्तन कैंसर के मरीजों में पाये जाते हैं वे हैं ‘‘बी.आर.सी.ए. 1‘‘ और बी.आर.सी.ए. 2 (ब्रेका 1 ओर ब्रेका 2)। इन उत्परिवर्तन जीन्स होने का मतलब यह नहीं है कि आपको स्तन कैंसर निश्चित रूप से हो जायेगा।

बिना उत्परिवर्तन के हुये कैंसर की तुलना में बी.आर.सी.ए. 1 और बी.आर.सी.ए. 2 उत्परिवर्तन से जुड़ा हुआ स्तन कैंसर युवा महिलाओं में ज्यादा होता है और दोनों स्तनों को प्रभावित करता हैं। महिलायें जो इन म्यूटेशन से जुड़ी हैं उनमें डिम्बग्रथि के कैंसर के विकास का खतरा भी बढ़ जाता है। स्तन कैंसर के साथ जुड़े हुये उत्परिवर्ती जीन्स देखने के लिये जेनेटिक परीक्षण उपलब्ध है। जेनेटिक परीक्षण हर किसी के लिये नहीं है। आपको अपने चिकित्सक से परामर्श या चर्चा करनी चाहिये कि यह परीक्षण आपके मामलें में सहायक है या नहीं।

  • मासिक धर्म का इतिहास: कम उम्र में मासिक धर्म की शुरूआत होना (12 साल की उम्र से पहले) स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। इसी तरह अधिक उम्र में रजोनिवृति होने से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।[9]
  • स्तन कैंसर के अतीत का इतिहास: यदि आपको पहले एक स्तन में कैंसर हुआ है, तो दूसरे स्तन में कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

जोखिम कारक जिन्हें संशोधित किया जा सकता हैं (जीवन शैली से संबंधित)

  • मोटापा: अत्याधिक मोटापा स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है।[10] और पढ़े
  • गर्भावस्था : महिलायें जिन्होंने कभी गर्भधारण न किया हो उन्हें स्तन कैंसर का खतरा अधिक रहता हैं उन महिलाओं की तुलना में जिन्होनें एक या एक से अधिक बार गर्भधारण किया हो। इसी तरह महिलायें जिन्होनें 35 वर्ष की आयु के बाद गर्भधारण किया हो उन्हें भी स्तन कैंसर का खतरा अधिक रहता है।[11].
  • स्तनपान: स्तनपान न कराने या कम कराने से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।[12].
  • मद्यपान: अत्याधिक मात्रा में शराब का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
  • हार्मोन का सेवन: ‘‘संयुक्त एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन‘‘ हार्मोन थेरेपी दवाओं (हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ता है। यह थेरेपी महिलाओं को रजोनिवृति के लक्षणों से राहत पाने के लिये दी जाती है।[13]. दवाइयों का सेवन बंद करने के उपरांत जोखिम कम हो जाता हैं।
  • विकिरण अनावरण: बाल्यावस्था या युवावस्था में उपचार के दौरान सीने या छाती में विकिरण या रेडियशन प्राप्त करना अथवा मध्यम से उच्च मात्रा में विकिरण के जोखिम में रहने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।

 स्तन कैंसर संकेत एवं लक्षण

  • स्तन कैंसर का सबसे आम लक्षण स्तन में गांठ होता है। यदि यह गाँठ अनियमित किनारों के साथ सख्त भी है तो इसके कैंसर युक्त होने की संभावना अधिक है।[14,15]
  • स्तन या निप्पल के रूप में कोई परिवर्तन[16,17]
    1. स्तन के आकार एवं बनावट में अस्पष्टीकृत परिवर्तन
    2. स्तन में अस्पष्टीकृत सिकुड़न
    3. स्तन में अस्पष्टीकृत सूजन, विशेष रूप से एक तरफ
    4. स्तन के आकार में असमानता (महिलाओं में एक सतन की तुलना में दूसरा स्तन थोड़ा स्तन थोड़ा छोटा होता है। लेकिन अगर यह विषमता हाल ही मं पाई गई है तो अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।)
    5. स्तन में कही भी प्रगर्तन या गड्ढ़ा पड़ना।
    6. निप्पल के अंदर की ओर धसना या उल्टा होना।
    7. निप्पल या उसके आसपास की त्वचा में ललिमा।
    8. स्तन की त्वचा में असामान्य छिद्र, जो दिखने में संतरे के छिलके जैसी लगती है।
  • माँ के दूध के अलावा स्तन से पानी जैसा या खूनयुक्त स्त्राव [18]
  • लिम्फ नोड्स में सूजन

स्तन कैंसर के लिम्फ नोड्स तक फैलने के कारण बगल या कालर बोन के आसपास सूजन हो सकती है। आप हर महीने स्वयं स्तन परीक्षण करके स्तन कैंसर के इन लक्षणों क जाँच कर सकते है। यदि आपको कुछ भी असमान्य मिलता है तो अपने चिकित्सक से परामर्श करें। [19].

स्तन कैंसर का निदान [20]

  • शारीरिक परीक्षण: चिकित्सक आपके स्तन व बगल के हिस्से में गांठ का पता लगाने के लिए परिस्पर्शन द्वारा परीक्षण करेगा। निप्पल के परीक्षण में कोई संदिग्ध स्त्राव, त्वचा में परिवर्तन या अंदर की तरफ खिचांव जैसे लक्षणों के लिये देखा जाएगा।
  • इमेजिंग परीक्षण
    1. मैमोग्राम: मैमोग्राफी मशीन आपके स्तन के चित्र लेने के लिए कम मात्रा की एक्सरे का उपयोग करती है। मशीन प्रत्येक स्तन पर दबाव डालकर एक्सरे चित्र लेती है। यह जाँच आमतौर पर स्तन कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिये प्रयोग किया जाता है।
      1. डिजिटल मैमोग्राम: एक डिजिटल मैमोग्राम कम्प्यूटर पठनीय प्रारूप में प्रत्येक स्तन की इलेक्ट्राॅनिक फिल्मों को संग्रह करता है। यह एक मानक मैमोग्राम की तुलना में भिन्न है जिसमें एक्सरे फिल्म सीधे बनाई जाती है।
      2. नैदानिक मैमोग्राम: यह परीक्षण असामान्य मैमोग्राम या स्तन की विषमता की जाँच करने हेतु किया जाता है। इसमें सामान्य मैमोग्राम से अतिरिक्त चित्रों को लिया जाता है।
    2. स्तन अल्ट्रासाउंड: इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड मशीन उच्च आवृति ध्वनि तरंगो को आपके स्तन से भेजती है और स्तन के ऊतकों से प्राप्त ध्वनि संकेतों को कम्प्यूटर स्क्रीन पर चित्र के रूप में परिवर्तित करती है। इन चित्रों द्वारा डाॅक्टर को किसी असामान्यता का पता चलता है। स्तन अल्ट्रासाउंड द्वारा पुटिका और ठोस ऊतक के बीच का अंतर पता चल सकता है।
    3. एम.आर.आई स्कैन: इस प्रक्रिया में, एक उच्चस्तरीय चुबंक और कम्प्यूटर द्वारा स्कैन करके स्तन व आसपास के अंगो का विस्तृत चित्र बनाया जाता है। स्तन का एम.आर.आई. स्कैन केवल विशिष्ट मामलों में करना उचित है जहाँ मैमोग्राम अपर्याप्त सिद्ध हुआ हो।
  • बायोप्सी (जीवित ऊतकों की जाँच):
    1. एफ.एन.ए.सी. (सुई की जाँच): शारीरिक परीक्षण मैमोग्राम में विषमता मिलने पर स्तन के असामान्य क्षेत्र से सुई की जाँच की जाती है। इसमें एक पतली सुई और सिरिंज द्वारा गाँठ से थोड़ा सा द्रव्य लेकर उसमें कैंसर की कोशिकाओं की जाँच की जाती है। यह जाँच बेहोश किये बिना ही की जाती है।
    2. कोर बायोप्सी: इस प्रक्रिया में एक बड़ी खोखली सुई स्तन की गाँठ में डालकर बेलनाकार टुकड़ों को निकाला जाता है। इन टुकड़ों की लैब में जाँच की जाती है। इस परीक्षण में सुई की जाँच से अधिक ऊतक प्राप्त होते हैं।
    3. स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी: इस परीक्षण में डाॅक्टर कम्प्यूटरीकृत चित्रों का उपयोग करते हुये स्तन के ऊतकों तक पहुँचकर जाँच के लिये टुकड़ा लेता है। यह जाँच संवेदनाहरण में की जाती है।
    4. सर्जिकल (ओपन) बायोप्सी: कभी कभी कैंसर की जाँच करने के लिये स्तन की गांठ का एक हिस्सा या पूरी गांठ शल्य चिकित्सा द्वारा बाहर निकाली जाती है, जिसकी प्रयोग शाला में जाँच की जाती है। यह प्रक्रिया बेहोशी में की जाती है।
  • निप्पल स्त्राव कोशिका विज्ञान (निप्पल स्त्राव परीक्षा): इस परीक्षण में निप्पल से निकले तरल पदार्थ को माइक्रोस्कोप द्वारा देखकर उसमें कैंसर कोशिकाओं की उपस्थिति पता लगाई जाती है। यदि इस जाँच का परिणाम नकारात्मक हो, परन्तु डाॅक्टर को लाक्षणिक संदेह हो तो वह अन्य परीक्षणों द्वारा निदान कर सकता है।

प्रारंभिक जाँच[21,22]

  • क्लीनिकल ब्रेस्ट परीक्षण (स्तन परीक्षण)

सभी महिलाओं को 30 साल की उम्र के बाद प्रति वर्ष क्लीनिकल ब्रेस्ट परीक्षण अवश्य कराना चाहिये। अस्पताल में स्तन परीक्षण एक डाॅक्टर, नर्स या चिकित्सा संबंधी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा किया जाता है। इस जाँच में चिकित्सक पहले आपके स्तन के निप्पल त्वचा, आकार या आकृति में असामान्यताएँ / परिवर्तन को सावधानी पूर्वक देखेगा। फिर उंगलियों का प्रयोग करके परीक्षक किसी भी गाँठ की उपस्थिति को स्तनों में महसूस करेगा। दोनों स्तन के बगल में भी परीक्षण करेगा जिससे लिम्फ नोड्स की किसी भी सूजन का पता लगाया जा सकें।

  • स्वयं स्तन परीक्षण (बी.एस.ई.)

आपको अपने स्तनों का स्वयं परीक्षण करने का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए। अपने स्तनों की महसूस कीजिए और अगर स्तन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन लगता है, तो तुरन्त चिकित्सक से सलाह लें।
बी.एस.ई. स्तन कैंसर के शुरूआती लक्षण देखने के लिये, 20 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिये एक विकल्प है।

** पूर्व निदान आपकी उंगलियों पर **

  • स्वयं स्तन परीक्षण की विधि:

हर महीने स्वयं स्तन परिक्षण करें!

  • मैमोग्राम परिक्षण
    चिकित्सक की सलाह के अनुसार कराये।